#RIP_RIGHT_TO_INFORMATION_ACT.
(RTI के साथ छेड़छाड़ कर लोकतंत्र की हत्या की कोशिश)
✒- *D•K• Roy*
काफी खेद के साथ ही सूचित करना पर रहा है मित्रो कि देश के जनता को ताकत देने वाली,सत्ताधारियो को जमीन की औकात दिखाने वाली ,देश को सशक्त करने वाली सफल व कारगार कानून व अधिनियम#RTI को बहुमत धारी सरकार ने देश के लोकतंत्र के मन्दिर मे सिर कलम कर दिया।
पूरा मामला समझने के लिए मैं आपको यह अवगत कराना चाहता हूँ कि RTI वह अधिनियम व व्यवस्था है जिसका स्वरूप पूर्ण रूप से देश में अक्टूबर 2005 में लागू किया गया। जिसके अन्तर्गत सूचना का अधिकार सभी नागरिको को सरकार अपनी कार्य व शासन प्रणाली को सार्वजनिक रूप से बताने के लिए बाध्य है। इसी अधिनियम के कारण बहुत सारी भ्रष्टाचार व घोटाले, अलोकतांत्रिक कार्य पकङे भी गये,,,और सरकार के बहुत सी योजनाओं का वास्तविक धरातल भी पता चली!
* यह अधिनियम के अंतर्गत एक सूचना आयोग(Information Commission) केन्द्रीय व राज्य स्तर पर होती है जिसमे एक- एक मुख्य सूचना आयोग(Chief Information Commissioner) होती है।जिनका प्रमुख कार्य होता है यदी आप किसी सरकारी कार्य या कार्यालय में RTI फाइल करते है और आपके RTI का जवाब नही आता है या देने से मना करता है तो ऐसे परिस्थिति में आप इन कमिश्नर के पास शिकायत कर सकते है और फिर कमिश्नर उस सरकार को कङी आदेश देता है जिनका पालन करना बाध्यता होती है इन कमिश्नर के कार्यकाल 5 सालो व वेतन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भांति निश्चित किया गया था ताकी पूरे व्यवस्था व आयोग की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहे। लेकिन *वर्तमान सरकार इनकी स्वतंत्रता पर सेंध लगाने व औपचारिक रूप से खत्म करने के लिए RTI AMENDMENTS ACT, 2019 संसद से अपने संख्या के बल पर पास करा ली है। जिसके तहत अब केन्द्रीय व राज्य के सूचना आयोग के कमिश्नर के कार्यकाल व वेतन का निर्धारण *केन्द्र सरकार ही करेगी,,,,जो किसी भी हालत में इनकी स्वतंत्रता बरकरार नही रह सकती है। क्योंकि यदि आयोग के कोई कमिश्नर सरकार के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी तो या तो उनका तबादला हो जायेगा या फिर वेतन मे कटौती व वृद्धि कर दी जाएगी। जरा आप ही सोचिए क्या ऐसे परिस्थिति में सरकार की पारदर्शिता व कर्तव्यनिष्ठा जनता के प्रति कायम रखी जा सकेगी????? यहा पर मैं एक और उदाहरण से समझने का प्रयास करते है
--- आप सुनते होंगें कि हमारे देश मे जो भी ईमानदार पूलिस व जिला अधिकारी किसी नेता के खिलाफ कार्रवाई करते है तो सरलता से उनका चुटकी में तबादला व डीमोशन कर दिया जाता है। तो सोचिए RTI के अधिकारी के साथ क्या होगा??
आपके मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि आखिर यह 56 ईन्च वाले सरकार ने ऐसा क्यो किया तो यह भी मैं आपको बता देता हूँ कि ---आपको ज्ञात होगा कि 2015 में एक नीरज शर्मा नाम के RTI कार्यकर्ता ने मोदी के डीग्री जानने के लिऐ DELHI UNIVERSITY(DU) के खिलाफ RTI फाईल किया जिसमे यह जानकारी मांग की ,कि 1978 ई मे DU से जिन जिन लोगो ने B.A की डीग्री ली है उनका नाम सह रोल न॰ तथा माक्र्स मिल सकती है क्या ?लेकिन DU ने ऐसा करने से मना कर दिया तब उस कार्यकर्ता ने मुख्य सूचना आयुक्त(CIC) से शिकायत की तब फिर DU को यह आदेश दिया गया कि जानकारी उपलब्ध करायी जाए। लेकिन DU ने ऐसा करने से मना किया और DU के तरफ से सिर्फ यह कहा गया कि मोदी ने यहा से डिग्री ली है लेकिन अंक सह नाम की सूची जारी नही की गई,,,,,, और आज भी यह केस Delhi high Court में चल रही है कि DU को नामसूची सह रोल नंबर दिखानी चाहिए या नही??
दुसरा यदि आप देखेंगे तो पायेंगे की एक RTI फाइल RBI के खिलाफ की गई,जहां पूछा गया कि देश के जितने भी NPA व बैंक डिफॉल्टर है उनका नाम सार्वजनिक किया जाए लेकिन RBI ऐसा करने से मना कर दिया और फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट मे पेंडिंग है ......तो आप यह सोच सकते है कि सरकार यहा कितना दुविधा व विषम परिस्थिति में है।।शायद यही कारण भी है संशोधन करने के पिछे!
और तो और मौजूदा सरकार का RTI के ऊपर यह संशोधन बिल पहला हमला नही है बल्कि यह तो आयोग के कमिश्नर पोस्ट पूरी तरह से खाली रखी गई जहां 2018 से हाल तक 11 में से 8 पोस्ट खाली पड़ी हुई थी जिसके बजह से लगभग 32 हजार से अधिक केस पेंडिंग पड़े हुए है,,,,,तो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 4 पोस्ट भङे गये लेकिन अभी भी चार पोस्ट खाली
तब आप सब बोलेंगे कि जब इतना गलत है यह RTI संशोधन एक्ट तो लोग विरोध क्यो नही करते है भाई । तो आप जानते ही है मिडिया हमारी कितना बिकाऊ है?,,,तो वह यह सब तो दिखायेंगे नही,,,,,,जितने भी विपक्ष है सभी ने इसका विरोध किया है और अरुणा राय जिन्होंने इस अधिनियम को बनाने मे भूमिका निभाई वह विरोध प्रदर्शन कर रही है और अन्ना हजारे ने भी इस संशोधन को खुलकर अधिनायकबाद करार दिया और विरोध आन्दोलन पर स्वास्थ्य के कारण नही है,,,,
अतः यह संशोधन बिल्कुल गलत है इसमे किसी भी प्रकार की छेड़छाङ नही होनी चाहिए क्योंकि यह एक ऐसा कानून व व्यवस्था था जिसके वजह से काफी बेईमानी,भ्रष्टाचार व गैर लोकतांत्रिक कार्य पकङे गये। पिछली सरकार भी बहुत से घोटाले कोयला घोटाले, 2G घोटाले इत्यादि भी RTI के बदौलत पकड़ी गयी,,,,और सत्ता से वापस जाना पङा था,,,,और भी अन्य इत्यादि
कुल मिलाकर यह कहा जाए तो वर्तमान सरकार की यह RTI संशोधन पास करने की मंशा केवल व केवल अपने कुनीति व भ्रष्ट कार्य को छुपाने के उद्देश्य से की है,,,,,,यह अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास है। आप मेरे विरोध से सहमत है तो जनहित व लोकतन्त्र के हित में जरूर साझा करे। और आशा करते है कि सुप्रीम कोर्ट इसमे कुछ पहल करे।।
#SaveRTI
#SaveDemocracy
✒--*#दी॰के॰राय*(D•K• ROY)
(RTI के साथ छेड़छाड़ कर लोकतंत्र की हत्या की कोशिश)
✒- *D•K• Roy*
काफी खेद के साथ ही सूचित करना पर रहा है मित्रो कि देश के जनता को ताकत देने वाली,सत्ताधारियो को जमीन की औकात दिखाने वाली ,देश को सशक्त करने वाली सफल व कारगार कानून व अधिनियम#RTI को बहुमत धारी सरकार ने देश के लोकतंत्र के मन्दिर मे सिर कलम कर दिया।
पूरा मामला समझने के लिए मैं आपको यह अवगत कराना चाहता हूँ कि RTI वह अधिनियम व व्यवस्था है जिसका स्वरूप पूर्ण रूप से देश में अक्टूबर 2005 में लागू किया गया। जिसके अन्तर्गत सूचना का अधिकार सभी नागरिको को सरकार अपनी कार्य व शासन प्रणाली को सार्वजनिक रूप से बताने के लिए बाध्य है। इसी अधिनियम के कारण बहुत सारी भ्रष्टाचार व घोटाले, अलोकतांत्रिक कार्य पकङे भी गये,,,और सरकार के बहुत सी योजनाओं का वास्तविक धरातल भी पता चली!
* यह अधिनियम के अंतर्गत एक सूचना आयोग(Information Commission) केन्द्रीय व राज्य स्तर पर होती है जिसमे एक- एक मुख्य सूचना आयोग(Chief Information Commissioner) होती है।जिनका प्रमुख कार्य होता है यदी आप किसी सरकारी कार्य या कार्यालय में RTI फाइल करते है और आपके RTI का जवाब नही आता है या देने से मना करता है तो ऐसे परिस्थिति में आप इन कमिश्नर के पास शिकायत कर सकते है और फिर कमिश्नर उस सरकार को कङी आदेश देता है जिनका पालन करना बाध्यता होती है इन कमिश्नर के कार्यकाल 5 सालो व वेतन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भांति निश्चित किया गया था ताकी पूरे व्यवस्था व आयोग की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहे। लेकिन *वर्तमान सरकार इनकी स्वतंत्रता पर सेंध लगाने व औपचारिक रूप से खत्म करने के लिए RTI AMENDMENTS ACT, 2019 संसद से अपने संख्या के बल पर पास करा ली है। जिसके तहत अब केन्द्रीय व राज्य के सूचना आयोग के कमिश्नर के कार्यकाल व वेतन का निर्धारण *केन्द्र सरकार ही करेगी,,,,जो किसी भी हालत में इनकी स्वतंत्रता बरकरार नही रह सकती है। क्योंकि यदि आयोग के कोई कमिश्नर सरकार के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी तो या तो उनका तबादला हो जायेगा या फिर वेतन मे कटौती व वृद्धि कर दी जाएगी। जरा आप ही सोचिए क्या ऐसे परिस्थिति में सरकार की पारदर्शिता व कर्तव्यनिष्ठा जनता के प्रति कायम रखी जा सकेगी????? यहा पर मैं एक और उदाहरण से समझने का प्रयास करते है
--- आप सुनते होंगें कि हमारे देश मे जो भी ईमानदार पूलिस व जिला अधिकारी किसी नेता के खिलाफ कार्रवाई करते है तो सरलता से उनका चुटकी में तबादला व डीमोशन कर दिया जाता है। तो सोचिए RTI के अधिकारी के साथ क्या होगा??
आपके मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि आखिर यह 56 ईन्च वाले सरकार ने ऐसा क्यो किया तो यह भी मैं आपको बता देता हूँ कि ---आपको ज्ञात होगा कि 2015 में एक नीरज शर्मा नाम के RTI कार्यकर्ता ने मोदी के डीग्री जानने के लिऐ DELHI UNIVERSITY(DU) के खिलाफ RTI फाईल किया जिसमे यह जानकारी मांग की ,कि 1978 ई मे DU से जिन जिन लोगो ने B.A की डीग्री ली है उनका नाम सह रोल न॰ तथा माक्र्स मिल सकती है क्या ?लेकिन DU ने ऐसा करने से मना कर दिया तब उस कार्यकर्ता ने मुख्य सूचना आयुक्त(CIC) से शिकायत की तब फिर DU को यह आदेश दिया गया कि जानकारी उपलब्ध करायी जाए। लेकिन DU ने ऐसा करने से मना किया और DU के तरफ से सिर्फ यह कहा गया कि मोदी ने यहा से डिग्री ली है लेकिन अंक सह नाम की सूची जारी नही की गई,,,,,, और आज भी यह केस Delhi high Court में चल रही है कि DU को नामसूची सह रोल नंबर दिखानी चाहिए या नही??
दुसरा यदि आप देखेंगे तो पायेंगे की एक RTI फाइल RBI के खिलाफ की गई,जहां पूछा गया कि देश के जितने भी NPA व बैंक डिफॉल्टर है उनका नाम सार्वजनिक किया जाए लेकिन RBI ऐसा करने से मना कर दिया और फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट मे पेंडिंग है ......तो आप यह सोच सकते है कि सरकार यहा कितना दुविधा व विषम परिस्थिति में है।।शायद यही कारण भी है संशोधन करने के पिछे!
और तो और मौजूदा सरकार का RTI के ऊपर यह संशोधन बिल पहला हमला नही है बल्कि यह तो आयोग के कमिश्नर पोस्ट पूरी तरह से खाली रखी गई जहां 2018 से हाल तक 11 में से 8 पोस्ट खाली पड़ी हुई थी जिसके बजह से लगभग 32 हजार से अधिक केस पेंडिंग पड़े हुए है,,,,,तो बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 4 पोस्ट भङे गये लेकिन अभी भी चार पोस्ट खाली
तब आप सब बोलेंगे कि जब इतना गलत है यह RTI संशोधन एक्ट तो लोग विरोध क्यो नही करते है भाई । तो आप जानते ही है मिडिया हमारी कितना बिकाऊ है?,,,तो वह यह सब तो दिखायेंगे नही,,,,,,जितने भी विपक्ष है सभी ने इसका विरोध किया है और अरुणा राय जिन्होंने इस अधिनियम को बनाने मे भूमिका निभाई वह विरोध प्रदर्शन कर रही है और अन्ना हजारे ने भी इस संशोधन को खुलकर अधिनायकबाद करार दिया और विरोध आन्दोलन पर स्वास्थ्य के कारण नही है,,,,
अतः यह संशोधन बिल्कुल गलत है इसमे किसी भी प्रकार की छेड़छाङ नही होनी चाहिए क्योंकि यह एक ऐसा कानून व व्यवस्था था जिसके वजह से काफी बेईमानी,भ्रष्टाचार व गैर लोकतांत्रिक कार्य पकङे गये। पिछली सरकार भी बहुत से घोटाले कोयला घोटाले, 2G घोटाले इत्यादि भी RTI के बदौलत पकड़ी गयी,,,,और सत्ता से वापस जाना पङा था,,,,और भी अन्य इत्यादि
कुल मिलाकर यह कहा जाए तो वर्तमान सरकार की यह RTI संशोधन पास करने की मंशा केवल व केवल अपने कुनीति व भ्रष्ट कार्य को छुपाने के उद्देश्य से की है,,,,,,यह अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास है। आप मेरे विरोध से सहमत है तो जनहित व लोकतन्त्र के हित में जरूर साझा करे। और आशा करते है कि सुप्रीम कोर्ट इसमे कुछ पहल करे।।
#SaveRTI
#SaveDemocracy
✒--*#दी॰के॰राय*(D•K• ROY)

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