हिन्दी कविता (Hindi kavita)
*देश की दशा* ✒-(दीपक कुमार राय)
देश की बढती अबादी को देखकर दुनिया बेजुबान है,
आज हमलोग यह तमाशा देखकर हैरान है।
गरीबी व बेरोजगारी नेताओ की जुमलेबाजी का शिकार है,
इसे दूर करना समय की सबसे बड़ी मांग है ।
किसान विकास मजदूर वर्ग पेशे से परेशान है,
हमारे देश के लिए वक्त की यही पहचान है ।
केवल एक नेतृत्व से ना होने वाला है समस्या का निपटान ,
समाज के सभी वर्गो को करना होगा करना होगा मिलकर योगदान।
बहुत खतरे से परिपूर्ण होते है सियासत का खेल,
हम आम जन ना समझ पायेंगे,हम जन है बहुत नादान ।
देश मे रहते अरबो लोग शांत कैसे रहूं।
हर पंक्ति अब राष्ट्र के कष्टों वह समस्या का बयान है ।
देश के समस्या से मुह मोङ लेना, हम सभी के लिए बेईमानी है ।
देश की बढती अबादी को देखकर दुनिया बेजुबान है,
आज हमलोग यह तमाशा देखकर हैरान है।
गरीबी व बेरोजगारी नेताओ की जुमलेबाजी का शिकार है,
इसे दूर करना समय की सबसे बड़ी मांग है ।
किसान विकास मजदूर वर्ग पेशे से परेशान है,
हमारे देश के लिए वक्त की यही पहचान है ।
केवल एक नेतृत्व से ना होने वाला है समस्या का निपटान ,
समाज के सभी वर्गो को करना होगा करना होगा मिलकर योगदान।
बहुत खतरे से परिपूर्ण होते है सियासत का खेल,
हम आम जन ना समझ पायेंगे,हम जन है बहुत नादान ।
देश मे रहते अरबो लोग शांत कैसे रहूं।
हर पंक्ति अब राष्ट्र के कष्टों वह समस्या का बयान है ।
देश के समस्या से मुह मोङ लेना, हम सभी के लिए बेईमानी है ।

Bhut khud
ReplyDeleteKya baat hai maja agya padh ke
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